जानिए Eco Friendly Cheap Electricity अर्थात पर्यावरण अनुकूल सस्ती बिजली के बारे में पूरी जानकारी

हेलो फ्रेंड्स ! आज हम इस लेख के माध्यम से जानने वाले हैं Eco Friendly Cheap Electricity अर्थात पर्यावरण अनुकूल सस्ती बिजली के बारे में। 

जिसमे हम आपको यह भी बताएँगे कि बिजली का उत्पादन कैसे होता है (How Electricity Is Produced), बिजली उत्पादन कितने प्रकार के होते हैं (What Are The Types Of Electricity Production), 

तो फिर बिना देरी किये बिना चलिए जानते हैं कि Eco Friendly Cheap Electricity अर्थात पर्यावरण अनुकूल सस्ती बिजली के बारे में। 

Eco Friendly Cheap Electricity अर्थात पर्यावरण अनुकूल सस्ती बिजली 

जैसा की हम जानते है कि – आज संपूर्ण विश्व बाढ़, तूफान, सूखा और कोविड जैसी समस्याओं से ग्रसित हैं। यह समस्याएं कहीं न कहीं मनुष्य द्वारा पर्यावरण में अत्यधिक दखल देने के कारण उत्पन्न हुई है। 

इस दखल का एक प्रमुख कारणबिजली का उत्पादन (Electricity Production) भी है। थर्मल पावर को बनाने के लिए बड़े क्षेत्रों में जंगलों को काटकर कोयले का खनन किया जाता है, जिससे वनस्पति और पशु प्रभावित होती है। 

इसी तरह जल विद्युत (Hydro Power Electricity) के उत्पादन के लिए भी नदियों को अवरोध किया जाता है, जिससे मछलियों की जीविका दूभर होती है। 

लेकिन मनुष्य को बिजली की आवश्यकता भी है। अक्सर किसी देश के नागरिकों के जीवन स्तर को प्रति व्यक्ति बिजली की खपत से आका जाता है। 

अतएव ऐसा रास्ता निकालना है कि हम बिजली का उत्पादन कर सकें और पर्यावरण के दुष्प्रभाव को भी सीमित कर सकें। 

बिजली उत्पादन के प्रकार (Types Of Electricity Production In Hindi)

अपने देश में बिजली उत्पादन के तीन प्रमुख स्रोत हैं। जो निम्लिखित इस प्रकार है –

  • थर्मल (Thermal Electricity)
  • जल विद्दुत (Hydro Power Electricity)
  • सौर ऊर्जा (Solar Energy)

1. थर्मल (Thermal Electricity)

थर्मल यानी कोयले से निर्मित बिजली। इसमें प्रमुख समस्या यह है कि अपने देश में कोयला सीमित मात्रा में ही उपलब्ध हैं। हमें दूसरे देशों से कोयला भारी मात्रा में आयात करना पड़ता है।

#थर्मल विद्दुत उत्पादन का दुष्प्रभाव 

यदि कोयला आयात करके हम अपने जंगलों को बचा भी ले तो आस्ट्रेलिया जैसे निर्यातक देशों में जंगल के कटने और कोयले खनन से जो प्राणी दुष्प्रभाव होंगे, वे हमें भी प्रभावित करेंगे।

कोयले को जलाने में कार्बन का उत्सर्जन भारी मात्रा में होता है, जिसके कारण धरती का तापमान बढ़ रहा है और तूफान, सूखा एवं बाढ़ जैसी आपदाएं उत्तरोत्तर बढ़ती ही जा रही हैं।

2. जल विद्दुत (Hydro Power Electricity)

बिजली उत्पादन का दूसरा स्रोत जल विद्युत अथवा हाइड्रो पावर है। इस विधि को एक साफ-सुथरी तकनीकी कहा जाता है, क्योंकि इससे कार्बन उत्सर्जन कम होता है। 

थर्मल पावर में एक यूनिट बिजली बनाने में लगभग 900 ग्राम कार्बन का उत्सर्जन होता है। जबकि जल विद्युत परियोजना को स्थापित करने में जो सीमेंट और लोहा आदि का उपयोग होता है, उसको बनाने में लगभग 300 ग्राम कार्बन प्रति यूनिट का उत्सर्जन होता है। 

Eco Friendly Cheap Electricity अर्थात पर्यावरण अनुकूल बने सस्ती बिजली के बारे में - बिजली उत्पादन के प्रकार, पूरी जानकारी हिंदी में

#जल विद्दुत उत्पादन का दुष्प्रभाव 

जल विद्युत में कार्बन उत्सर्जन में शुद्ध कमी 600 ग्राम प्रति यूनिट आती हैं, जो कि महत्वपूर्ण है। लेकिन जल विद्युत बनाने में दूसरे तमाम पर्यावरण दुष्प्रभाव पड़ते हैं। 

जैसे सुरंग को बनाने में विस्पोट किए जाते हैं, जिससे जल स्रोत सुखते हैं और भूस्खलन होता है। बैराज बनाने से मछलियों का आवागमन बाधित होता और जलीय जैव विविधता नष्ट होती है।

बड़े बांधों में सेडीमेंट जमा हो जाता है और सेडीमेंट के ना पहुंचने के कारण गंगासागर जैसे हमारे तटीय क्षेत्र समुद्र की गोद में समाने की दिशा में हैं।

पानी को टर्बाइन में माथे जाने से उसकी गुणवत्ता में कमी आती है। इस प्रकार थर्मल और हाइड्रो दोनों ही स्रोतों की पर्यावरण समस्या है। 

3. सौर ऊर्जा (Solar Energy)

सौर उर्जा को आगे बढ़ाने से इन दोनों के बीच रास्ता निकल सकता है। भारत सरकार ने इस दिशा में सराहनीय कदम उठाए हैं। अपने देश में सौर उर्जा का उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है।

विशेष यह है कि सौर उर्जा से उत्पादित बिजली का दाम लगभग 3 रुपया प्रति यूनिट आता है, जबकि थर्मल बिजली का 6 रुपया और जल विद्युत का 8 रुपया प्रति यूनिट।

इसलिए सौर उर्जा हमारे लिए हर तरह से उपयुक्त है। यह सस्ता भी है और इसके पर्यावरण दुष्प्रभाव भी तुलना में कम हैं। 

Eco Friendly Cheap Electricity अर्थात पर्यावरण अनुकूल बने सस्ती बिजली के बारे में - बिजली उत्पादन के प्रकार, पूरी जानकारी हिंदी में

#सौर ऊर्जा क्या है और कैसे बनती है ? इसको लेकर होने वाली समस्या 

सौर ऊर्जा में समस्या यह है कि यह केवल दिन में ही बनती है। रात में और बरसात के समय बादलों के आने जाने के कारण इसका उत्पादन अनिश्चित रहता है।

ऐसे में हम सौर उर्जा से अपनी सुबह-शाम और रात की बिजली की जरुरतों को पूरा नहीं कर पाते हैं। इसका उत्तम उपाय है कि “स्टैंड अलोन” यानी की स्वतंत्र पंप स्टोरेज विद्युत परियोजनायें बनाई जाए।

इन परियोजनाओं में दो बड़े तलाब बनाए जाते हैं। एक तलाब ऊंचाई पर और दूसरा नीचे बनाया जाता है। दिन के समय जब सौर उर्जा उपलब्ध होती है तब नीचे के तलाब से पानी को ऊपर के तलाव में पंप करके रख लिया जाता है।

इसके बाद सायंकाल और रात में जब बिजली की जरूरत होती है तब ऊपर से पानी को छोड़कर बिजली बनाते हुए नीचे की तलाब मे लाया जाता है।

अगले दिन उस पानी को पुनः पंप कर दिया जाता है। इस प्रकार वही पानी बार-बार ऊपर-नीचे होता रहता है। इस प्रकार दिन की सौर उर्जा को सुबह-शाम और रात की बिजली में भी परिवर्तित किया जा सकता है।

जल विद्युत परियोजना को पंप स्टोरीज में ही तब्दील कर दिया जाता है। दिन के समय इस परियोजना से एवं पानी को नीचे से ऊपर टिहरी झील में वापस डाला जाता है और रात के समय उसी टिहरी झील से पानी को निकाल कर बिजली बनाई जाती है।

जल विद्दुत परियोजना को पंप स्टोरेज में परिवर्तित कर दिन की बिजली को रात की बिजली बदलने का खर्च मात्र 40 पैसे प्रति यूनिट आता है।

इसलिए तीन रुपय की सौर उर्जा को हम 40 पैसे की अतिरिक्त खर्च से सुबह-शाम की बिजली में परिवर्तित कर सकते हैं। 

लेकिन इसमें समस्या यह है कि टिहरी और कोटेश्वर जल विद्युत परियोजना से जो पर्यावरणीय दुष्प्रभाव होते हैं, वो तो होते ही रहते हैं। इस समस्या का उत्तम विकल्प यह है कि हम स्वतंत्र पंप स्टोरेज परियोजना बनाएं जैसा ऊपर बताया गया है। 

हमारी अंतिम राय-

जंगल और नदियां देश की धरोहर और प्रकृति एवं पर्यावरण की संवाहक है। इन्हें बचाते हुए बिजली के अन्य विकल्पों को अपनाना चाहिए।

हम उम्मीद करते हैं कि आपको यह लेख – Eco Friendly Cheap Electricity अर्थात पर्यावरण अनुकूल सस्ती बिजली के बारे में पूरी जानकारी हिंदी में पसंद आएगी। आपको हमारा यह लेख कैसा लगा comment करके हमें जरूर बताएं। 

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