जानिये सफलता पाने के लिए सफलता पर विश्वास करना जरुरी क्यों है ? हिंदी में

सफलता पाने के लिए सफलता पर विश्वास करना जरुरी क्यों है ? जी हाँ ! सफलता किसी व्यक्ति के विश्वास पर ही निर्भर करती है। जैसे – बीज पैदा होना, अंकुरित होना, उचित जलवायु मिलना, पौधा बनना, वृक्ष बनना और फिर फल लगना सत्य है। जिसमे एक बहुत बड़ी प्रक्रिया होती है। उसी तरह सफलता का फल पाने में वक्त लगता है, जो एका-एक ही नहीं मिलती। 

इच्छा का बीज पैदा होता है, लक्ष्य अंकुरित होता है, विश्वास और निश्चय की खाद मिले, तो पौधे से वृक्ष बनता है और उस पर सफलता के फल लगते हैं। इस प्रक्रिया में अगर विश्वास और निश्चय की खाद न मिले, तो बीज अंकुरण तक पहुंच सकता है, लेकिन सफलता का फलदार वृक्ष कभी नहीं बन सकता।

अगर आपके मन में सफल होने की इच्छा पैदा हुई है, तो उस इच्छा को और बलवान बनाइये। मार्ग में आने वाली कठनाईओं के विषय में सोचकर कभी भी घबराएं नहीं। 

सफलता के लिए सफलता पर विश्वास करना जरुरी !

किसी महान पंडित का कहना है कि – “महान कार्य वही कर सकता है, जो बराबर संघर्ष करने की क्षमता रखते हैं। उनका एक भी कदम पीछे नहीं हटता।” विश्वास रखें कि जो निश्चय आपने किया है, वह अवश्य पूर्ण होगा। पूरी शक्ति से अपने इच्छित लक्ष्य के प्रति जुट जाएं।

जितना आप अपनी सफलता पर संदेह करेंगे, सफलता उतनी ही दूर होती जाएगी। संदेह और आशंका व्यक्ति को कभी-भी आगे नहीं जाने देती। इसलिए आशंका के बीजो को दिल से निकाल फेकिये।

सफलता के लिए खुद पर विश्वास कैसे करें ? हिंदी में 

हमारे मन में उत्पन्न संदेह के भाव ही हमें असफल बनाती है। हमारी सोच ही हमें कार्य के लिए प्रेरित करती है। हमारे कर्म हमारे विचारो से प्रभावित होते हैं। आप इस बात पर विश्वास करते हैं कि – जैसा बीज बोयेंगे, वैसे ही फल की प्राप्ति होगी।

तो फिर यह क्यों भूल जाते हैं कि जैसे विचार का मन में रोपण होगा, वैसे ही कार्यशैली विकसित होगी। असफलता का विचार, असफलता देगा और उन्नति व् आत्मविश्वास से पुष्ट विचार सफलता का फल देगा। 

आपके मार्ग को अवरुद्ध करने के लिए बाधाएं आ सकती हैं, मगर फिर भी सफलता के प्रति संकित होने की जरा भी आवश्यकता नहीं है। ये बाधाएं आपके विश्वास की परीक्षा है।

सफलता पर विश्वास कैसे करें ? 

शेक्सपियर का कथन है कि – हमारे संशय ही हमें सबसे अधिक धोका देते हैं। इन्हीं कारण हमारे अधिकार से वे वस्तुएं निकल जाती हैं, जिन्हें हम सफलतापूर्वक प्राप्त कर सकते थे।

परन्तु संशय की वृत्ति के कारण सफलता में संदेह से हम उन वस्तुओं को प्राप्त करने का प्रयास ही नहीं करते। आपका अपनी योग्यताओं पर संदेह करना भी आपके आत्मविश्वास की कमी का कारण हो सकता है। जहाँ संदेह है, वहां विश्वास नहीं है।

जहाँ विश्वास नहीं हैं, वहां सफलता की कल्पना भी नहीं की जा सकती है।

हमारी अंतिम राय – 

हमारी अधिकांश शंकायें निराधार होती हैं। इसलिए कोशिश कभी एकांत में बैठकर विचार कीजिये। आप पाएंगे कि – आज तक जिन-जिन बातों और जिन-जिन परिस्थितियों के लिए आप कितने ही समय परेशांन रहें थे। वे कभी सामने ही नहीं आएं। 

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