#Jivan Me Chinta Nahin Chinta Kare|Chintamukt Jivan Kaise Jiye|

#Jivan Me Chinta Nahin Chinta Kare|Chintamukt Jivan Kaise Jiye|




दोस्तों ! आज हम जीवन में चिंता नहीं, चिंतन करें और chinta mukt jivan kaise jiye और इससे related चिंतन अर्थात विचार, मंथनयुक्त जीवन के बारे में जानेंगे। हमें चिंता को छोड़कर चिंतन पर focus करना बहुत जरुरी है ताकि हम Jivan Me Chinta Nahin Chintan Kare, क्योंकि चिंता बढ़ाने से हम शीघ्र ही मृत्यु की ओर बढ़ते हैं। जबकि चिंतन करने से हम Apni Life Me Grow करने के साथ-साथ काफी better बना सकते हैं। इससे हमारे mind की सोचने की क्षमता भी बढ़ती है। 



Jivan Me Chinta Nahin Chintan kare 

दोस्तों ! आज लोगो की सभी आदते उसकी चिंताओं के कारण बदल गई है। मगर चिंतन Chinta करने की आदत नहीं बदली। चिंता से हमें कभी भी संतुष्टि नहीं मिलती। वहीँ अगर हम चिंता छोड़ chintan करे तो हमें शीघ्र ही अपने कार्य में संतुष्टि अवश्य मिलेगी। और हमें हमेशा इस पर ज्यादा focus करना चाहिए कि - Procare Kaise Rahen


Jivan Me Chinta Nahin Chintan Kare

जीवन में आप एक बात को हमेशा के लिए गाठ बांध लीजिये कि आज तक कोई भी इंसान चिंता करके कुछ भी हासिल नहीं कर सका है। चिंतित व्यक्ति अपनी योग्यता होते हुए भी अपनी पूर्ण योग्यता को सिद्ध नहीं कर पाता है। 

"जीवन एक संघर्ष" LIFE CHANGING motivational speech" 

मन को सुबह के सैर के समान सोचिये , विचारिये , चिंतन कीजिये मगर चिंता न कीजिये। क्योंकि दुनिया में ऐसा कोई इंसान नहीं होगा , जो कभी भी  चिंता का अनुभव न किया हो। लेकिन कुछ इंसानो को हमेशा चिंता में रहने की आदत  पड़ जाती है। ऐसे इंसान थोड़ी - थोड़ी बातों पर अपनी मानसिक शक्तिओं को कमजोर बना लेते हैं।


Jivan Me Chintan Kyon Jaruri Hai?

दोस्तों ! Jivan Me Chintan Karna बहुत जरुरी है क्योंकि चिंतन करने से हम अपने आने वाले कल को बेहतर रूप से improve कर सकते हैं। जबकि वहीँ दूसरी ओर chinta पर ध्यान देने से चिंता हमारी अंदर की शक्तिओं को धीरे - धीरे खोकला कर देती है। इसका  प्रभाव हमारी कार्य शक्ति पर पड़ता है। जीवन में बढ़ने के लिए चिंतन अर्थात विचार करना चाहिए। 

Jivan Me Chintan Kyon Jaruri Hai?

चिंता कार्य के  प्रभाव को सीमित कर देती है और हवा के झोको की तरह घटती - बढ़ती रहती है। चिंता इंसान को कमजोर बनाती है और ध्यान नष्ट करती है। इसलिए हम अपने Mind Ko Control Karna Sikhe   क्योंकि चिंता हमारे किसी भी कार्य को करने में असमर्थता प्रकट करती है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण माता - पिता को लेकर है। जो अपने बालको के लिए कई प्रकार से चिंता में रहते हैं।  जबकि इनको बालको के प्रति चिंता नहीं बल्कि चिंतन का विचार करना चाहिए। 

Chintamukt Kaise Rahen 

दोस्तों ! अब हमारे लिए यह जानना बहुत महत्वपूर्ण हो गया है कि - Ham Chintanmukt Kaise Rahen ? चिंता मुक्त रहने के लिए अपने अंदर किसी भी चीज की अपूर्ति को लेकर पूर्णरूप से संतुष्टि रखना चाहिए। इससे हम काफी हद तक अपनी चिंता को कम करने में सफल हो सकते हैं। चिंता से हमारे शरीर को बहुत हानि होती है। जिससे हम अपने आप को बहुत जर्जर अर्थात कमजोर समझने लगते हैं। आपने भी ज्यादातर ध्यान दिया होगा कि - आपके पास जो ज्यादा पढ़े-लिखे लोग होते हैं वे हर रोज अपने career के लेकर बहुत ज्यादा मात्रा में चिंतित रहते हैं। जिससे वो काफी कमजोर हो जाते हैं। 


Chintamukt Kaise Rahen


जो हो गया सो हो गया , उस पर पछतावा कैसा ? उस पर व्यर्थ चिंता करने से क्या लाभ। अगर कुछ गलत भी हो गया है , तो चिंता करके अपनी कार्य शक्ति को नष्ट न करें। हम ज्यादार बच्चो यह बताना चाहते हैं कि - आखिर एक अच्छा student कैसे बने ? क्योंकि अगर वे भविष्य में असफल होने की चिंता  करेंगे तो जरूर असफल होंगे।  इसलिए वो चिंता करना छोड़ दे।  यह चिंता उस व्यक्ति को होती है , जिसे खुद पर भरोसा नहीं होता है। आत्मविश्वास बहुत आवश्यक है , उदाहरण के लिए आप दुखी होने से बचना चाहते हैं तो आप हर सम्भव में प्रसन्न रहने की आदत बनानी चाहिए। 


Chintan Karna Kyon Jaruri Hai ?

दोस्तों ! चिंता एक रोग की तरह है, जैसे - पेड़ के टहनी से लगा हुआ पत्ता नीचे गिरता है , तो हरियाली में कमी आती है। उसी प्रकार चिंता करने से आत्मविश्वास में गिरावट आती है और हमारे कार्य में असमर्थता आती है। 


हमें किसी भी कार्य से पहले How to increase positive energy के बारे में जरूर अध्ययन करना चाहिए। हमेशा चिंता छोड़कर आत्मविश्वास पैदा कीजिये , बेफालतू के डर , चिंता , वहम , कमजोरी आपके आत्मविश्वास के ताकत को घटा देते हैं। आप के पास एक सबसे अमूल्य संपत्ति है,  जिसे न ख़रीदा जा सके न बेचा जा सके। बल्कि लगातार अध्ययन और चिंता से चिन्तन , प्रसन्नता  आदि है,जो की आत्मविश्वास है।

Chintan Karna Kyon Jaruri Hai ?

चिंता मनुष्य को दुर्बल और असहाय बनाती है। जिसे एकाग्रता नष्ट होती है। चिंतित इंसान का ध्यान किसी कार्य में होता है , और वह प्रयत्न किसी दूसरे कार्य के लिए कर रहा होता है। जैसे - किसी को जाना जयपुर है और वह बैठ गया है अमृतसर की गाड़ी में। 

Chintamukt Rahne Ke Upay

चिंता से मानसिक स्थिति ठीक से कार्य नहीं करती है। और इसके कारण उसके सभी कार्य असफल हो जाते हैं। बार - बार की असफलता उसके आत्मविश्वास को कम कर देती है। और योग्यता होते हुए भी चिंता रोग के कारण  वह जीवन भर चिंतित रहता है।


छात्र काल में कईं छात्र प्रतिभाशाली होती हैं। सभी को उनसे बड़ी अपेक्षाएं होती हैं। कक्षा में और खेलकूद में हमेशा आगे आते हैं। किन्तु जब उन्हें जीवन के यथार्थ धरातल में छोड़ा जाता है तो वो ठोकरे खाते रहते हैं। इसका मूलकारण चिंता ही है। तो हमें ऐसे कार्यो से दूर रहना चाहिए, जिससे की हमारी चिंता में वृद्धि न हो सके। 

Chintan Kyon Karen 

छात्र जीवन में उन्हें किसी भी बात की चिंता नहीं होती है। इसलिए वो प्रगति करते हैं , मगर जब शिक्षा पूरी कर लेते हैं , तो कई लोगो के कहना होता है कि - आजकल पढाई करके भी कुछ नहीं होता है। सिफारिस चाहिए या की बिना पैसे के नौकरी नहीं मिलती है, और उनका जीवन के संतुलन को बिगाड़ देते हैं। वे अपने सफलता पर संशय करने लगते हैं। साछात्कार के लिए जाते हैं किन्तु , मन में कहीं न कहीं चिंता और आशंका होती है , यह चिंता उन्हें सफलता नहीं होने देती। 

Chintan Kyon Karen

चिंता हमारी कार्यकुशलता , एकाग्रता पर निर्भर करती है। चिंतित व्यक्ति कभी एकाग्र नहीं हो पाता। उसके मन में सदैव निराशा के भाव भरे रहते हैं।इसलिए हमें जीवन में कभी भी चिंता नहीं करना चाहिए।  बल्कि चिंता मुक्त होकर हमें अपनी खुद की Personal Branding Kaise Kare इस पर ज्यादा focus करने के लिए विचार करना चाहिए। 



तो दोस्तों उम्मीद करते हैं कि - आपको भी समझ में आया होगा कि Hame Jivan Me Chinta Nahin, Chintan Karne की जरुरत होती है। ताकि हम भी अपने jivan को chintamukt बनाकर खुशहाल जिंदगी जी सके। और भी महत्वपूर्ण जानकारी के लिए हमारे अन्य post अवश्य पढ़े। 



Post a comment

please do not enter any spam link in the comment box