#Yog Se Nirog Kaise Bane|Apne Aap Ko Nirog Kaise Rakhe|

#Yog Se Nirog Kaise Bane|Apne Aap Ko Nirog Kaise Rakhe|



दोस्तों ! आज हम yog se nirog kaise bane, निरोग कैसे रहे और nirogi jivan kaise jiye से related topic के बारे में बात करेंगे कि  कैसे कोई भी व्यक्ति khud ko nirog kaise rakh सके। निरोग रहना सभी पसंद करते हैं। जिसके कारण लोग इससे जुड़ी चीजे को Google जैसे search engine में nirogi jivan kaise jiye अर्थात निरोग कैसे रहें सर्च करते हैं। 

आज के दौर में yog se nirog rahna बहुत ही बड़ा challenge बन चुका है। Nirogi Jivan जीना आज के परिवेष में स्वप्न सा हो गया है। फिर भी हम आज अपनी इस पोस्ट के जरिये khud ko nirog kaise rakhe, yog se nirog kaise rahe, nirogi jivan kaise jiye इत्यादि nirogi jivan से जुड़ी बातो पर चर्चा कर जानेंगे कि kaise yog se nirog rahen | 

Yog se nirog kaise bane

दोस्तों ! आज के भागदौड़ जिंदगी में लोगो को यह खोजना पड़ रहा है कि yog se nirog kaise bane आज की वर्तमान पीढ़ी बीमार और  किसी न किसी वजह से परेशान  होते ही जा रहें  हैं।इसका मुख्या कारण यह है कि आज के लोग अपने ही घर में क़ैद रहते है और वह पुरे दिन mobile में ही busy रहते हैं न ही वह किसी से बात करते है और न ही किसी प्रकार के योग करते है। केवल खाते भर है, वे किसी भी प्रकार के योग, व्यायाम नहीं करते ,जिससे वह दिन -दिन बीमार पड़ते जा रहे है। 

हम सभी लोग जानते हैं कि पुराने समय के लोग आहार संबंधी नियम अपनाकर एक लम्बे समय तक जीवन व्यतीत करते थे,और सदा खुशहाल जीवन जीते थे। 

yog se nirog kaise rahe



फिर भी हम आज भी अपने कुछ विशेष चीजों का उपयोग करते हुए बहुत  हद तक जीवन जीने में सफल हो सकते हैं। 

Apne Aap Ko Nirog Kaise Banaye 


दोस्तों ! हमें अपने आप  को Yog Se Nirog Rakhne Ke Liye हमें निम्न नियमों का पालन करके अपने आप को स्वस्थ्य रख सकते है। जैसे कि -यम ,नियम ,आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान ,समाधि।


ध्यान व् प्राणायाम योग ही अंग हैं,  योग शब्द युजिर योगे धातु से भी बनता है। जिसका मतलब है - जुड़ना अर्थात आत्मा का परमात्मा से मिलन  है। 



दोस्तों ! हमें अपने आपको yog  se nirog rakhne के लिए अपने जीवन में योग का sanyog ऐसे होना चाहिए जैसे संसार  में  संयोग के साथ वियोग , स्त्री के साथ पुरुष , सुख के साथ दुःख , दिन के साथ रात आदि। मनीषियों ने योग का गहन - मनन करने के बाद योग को मानव जीवन का अभिन्न अंग बतलाया है। इस प्रकार हम योग को apne जीवन में ग्रहण करके अपने आप को स्वस्थ रख सकते है। 

Nirogi शरीर  kaise banaye 

Nirogi Kaya kaise Banaye इसके लिए  सबसे महत्वपूर्ण है - मन की एकाग्रता। मन बड़ी कठिनाई से एकाग्र हो पाता है। ध्यान की सिद्धि के लिए यम नियमो द्वारा मन को एकाग्र करना आवश्यक है। क्योंकि जब तक हम अपने आप पर control नहीं करेंगे तब तक हम किसी भी प्रकार से अपने शरीर को nirog नहीं रख पाएंगे। 







ध्यान,योग और प्राणायाम के माध्यम से स्वस्थ चित रखकर मानव अपना कल्याण कर सकते है। अपने स्वस्थ शरीर के लिए पौष्टिक भोजन करना अतिआवश्यक है। 

योग से बनाये- निरोगी काया 

दोस्तों ! निरोगी काया आज के समय में बहुत आवश्यक है। आज विभिन्न योगिक केन्द्रो का उद्देश्य भी यही है। मानव योग को अपनाकर स्वस्थ काया बनाये , क्योंकि स्वस्थ ही सबसे बड़ी दौलत है। स्वस्थ मानव ही अपना यह लोक व् परलोक सुधारने में सक्षम हो सकता है। इसलिए जीवन में स्वस्थ कैसे रहें बहुत निर्भर करता है। 

Nirogi Kaya kaise Banaye इसके लिए हमें सर्वप्रथम निरोग होना होगा। जिससे हम धर्म , अर्थ (धन - दौलत ) , काम , मोक्ष आदि चारो पुरुषार्थो की उपलब्धि पा सके । क्योंकि जीवन में यह मायने नहीं रखता कि पैसे कैसे कमाए बल्कि आजीवन स्वस्थ कैसे रहे इन पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। 

Dhyan Yog  से रहें निरोग 

दोस्तों ! jivan me nirog rahne ke liye हमें meditation अर्थात ध्यानयोग से निरोग रहना होगा। जी हाँ ! healthy kaya banane के लिए हमें ध्यानयोग जो राजविद्या का एक अंग है। यह एक ऐसी कला है जिससे मन को एकाग्र किया जा सकता है। जो ध्यानयोग में सक्षम है , जिसे राजयोग का अभ्यास है , ऐसा मनुष्य अपने मन के रहस्यों को सहज ही जान लेने में सक्षम होता है।


वह मन व् शारीरिक इन्द्रियों को नियंत्रित करने की कला में expert होता है। वह निराशा को आशा में व् नास्तिक भाव को आस्तिक भाव में परिवर्तित करने वाला कुशल कलाकार होता है। 



yog se nirog kaise kare


Yog se nirog rahne ke liye हमें ध्यानयोग करना होगा जो हमें अपने मन पर काबू पाने की कला सिखाता है। जब कोई व्यक्ति किसी वस्तु कामना करता है तो वह बार - बार उसी वस्तु का चिंता करता रहता है। जबकि हमें जीवन में चिंता नहीं चिंतन करना चाहिए। किन्तु ज्यादातर लोगो मे  धीरे - धीरे वह वस्तु चित्त में स्थिर हो जाती है और उस व्यक्ति के लिए वही वस्तु ध्येय रूप धारण कर लेती है।


निरोगी जीवन कैसे जिए ?

Nirogi jivan kaise jiye, दोस्तों ! अगर कोई निरोग हो जाता है तो उसे साक्षात असीम आनंद की अनुभूति होती है। मनुष्य भय से पार हो जाता है ,और वह परम सत्ता व् परमात्मा का स्वरुप सत , चित्त व् आनंदमय है,उसी परमात्मा के सभी अंश है। इस प्रकार apne aap ko nirog kaise rakhe इसके लिए हमें  परमात्मा अर्थात सभी जीवों में सामान रूप से समाया हुआ ईश्वर पर विश्वास रखना होगा । वह सृष्टि के कण - कण में व्याप्त है। उससे कुछ भी छुपा नहीं है। वह सर्वदृष्टा सर्वज्ञाता सर्वव्यापी है।

जितने समय तक चित्त की वृत्तियां ध्येय रूप में रहती हैं , उतने समय तक की स्थिति ध्यान की स्थिति कहलाती है। Apne aap ko nirog rakhne ke liye हमें ध्यानयोगी को सर्वप्रथम भाव रखना चाहिए की परमात्मा सर्वव्यापक है। वही तीनो कालो का नियामक है


योग से healthy कैसे रहें?

Yog se healthy kaise rahen? जी हाँ, दोस्तों !योग से healthy कैसे रहें। दोस्तों ! हम सभी योग से अपने शरीर  को निरोग बना सकते हैं। और khud ko nirog रख सकते हैं। इसके लिए प्राणायाम मन के शोधन की क्रिया है। जब मन शुद्ध हो जाता है , तब वह अध्यात्म की और उन्मुख होकर परब्रह्मा में स्थिर होने लगता है। साधना की प्रथम क्रिया प्राणायाम  ही है। प्राणायाम में स्वांस की रेचक , पूरक व् कुम्भक क्रियाएं की जाती है। 


प्राणायाम योग का चौथा चरण है। यह शरीर व् मन दोनों का निग्रह करने करने का साधन है। साधना पथ में प्राणायाम का विशेष महत्व है। हमारे मनीषियों ने प्राणायाम  को गौरव दिया है। यदि प्राणायाम पर आधुनिक दृष्टि से विचार किया जाए तो स्पष्ट होता है की प्राणायाम से जहाँ हमारा शरीर तेजस्वी बनता है वहीँ इसमें रोग निरोधक क्षमताओं  का भी विकास होता है। 

निरोग रहना क्यों ज़रूरी है ?

दोस्तों ! आज हर कोई अच्छी तरह से वाकिफ है कि - निरोग रहना क्यों आवश्यक है। निरोग रहकर हम कोई भी कार्य को अच्छे ढंग से पूर्ण कर लेते हैं। और हमेशा खुशाल रहते हैं।  प्राणायाम के जरिये मनुष्य सदैव प्रफुल्लित रह सकता है। Nirog Jivan Kaise Jiye यह तभी संभव है, जब हम काम , क्रोध , लोभ , मोह , मद , द्वेष , ईर्ष्या , घृणा , दुःख , पीड़ा आदि जो नाना प्रकार के मानसिक विकारो से दूर रहें। 


इसलिए हमें निरंतर प्राणायाम को करते रहना चाहिए और कभी  जीवन में रुकना नहीं चाहिएजिनके कारण मानसिकता भंग  होती है , शरीर रोगग्रस्त जो जाता है। और हम निरोग जीवन नहीं जी पाते। 



तो दोस्तों ! हम उम्मीद करते है कि - Yog se nirog kaise bane इससे आपको काफी महत्वपूर्ण जानकारी मिली होगी और आप भी इन चीजों को अपने जीवन में implement करेंगे और एक स्वस्थ जीवन जिएंगे। और भी काफी महत्वपूर्ण जानकारी के लिए हमारी अन्य post अवश्य पढ़े। 




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