Story In Hindi

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1 . एक गांव में राम और श्याम नाम के दो भाई रहते थे। राम दिमाग से बहुत ही चतुर था। किन्तु वहीँ श्याम दिमाग से कमजोर था। राम पढ़ने में श्याम से चार गुना तेज था। उनके माता पिता का देहांत हो गया। इसके बाद श्याम पागल हो गया। 


उसकी अचानक तबियत खराब हो गयी। लगन का फल तब ऐसी स्थिति में राम के दिमाग में माता पिता के बातो का ख्याल आया कि - कितनी भी खराब स्थिति आ जाए ,  उसका सामना करना चाहिए। तब राम अपनी पढाई छोड़कर , श्याम के इलाज के लिए घर को चलाने के लिए पैसा को कमाने का मन बना लिया।

 तब वह गांव में एक छोटा सा नांव तैयार किया , और नांव में नाविक बनकर आने जाने वाले लोगो को एक स्थान से दूसरे स्थान को ले जाने का कार्य करने लगा। तब  उस कमाए गए पैसे से श्याम का इलाज करवाया ,  तथा स्थिति सुधर जाने पर गांव में ही अपना वाटर टैंकर बिज़नेस खोल पानी सप्लाई करने लगा और नाविक का काम अपने भाई श्याम को दिया। 


इस प्रकार राम अपनी बुद्धि  का इस्तमाल कर अपने को लाइन में लगाकर तथा  अपने भाई को साथ में रखकर पैसा कमाने लगा। 


शिक्षा - इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिली है कि स्थिति कितनी भी अच्छी  रहे , किन्तु ख़राब स्थिति आ ही जाती है। इसलिए अपने आप को असहाय न समझे और इस स्थिति का सम्मानतापूर्वक सामना करें। 





2 . यह कहानी तिब्बत की है। जहां दो युवा सन्यासी रहते थे। एक बार वो दूर जगह को जा रहे थे। रास्ते में उन्हें एक गहरी नदी मिली। वो दोनों जब उसे पार करने लगे , तो एक युवती  जीवन एक संघर्ष उनके करीब आई। और उन दोनों से नदी पार करने के लिए अपनी मदद मांगी।


 सन्यासी जिन्हे गुरु से निर्देश था कि - उन्हें महिलाओं से हमेशा दूर रहना है। वो दोनों सोच - विचार में पड़  गए। 

फिर भी उन दोनों ने युवती से किस प्रकार की मदद कर सकते हैं , यह पूछा। तब युवती ने कहा कि - वह तैरना नहीं जानती है। इसलिए उसे उनकी मदद चाहिए। फिर एक सन्यासी ने उसकी How to control our mind  मदद करने को कहा।



 तब वह उसे पीठ में बैठकर नदी पार कराया। और पहला सन्यासी बड़े विनम्र शब्द में इंकार कर दिया था। युवती ने दूसरे सन्यासी को धन्यवाद देकर अपने रास्ते की ओर चली गयी। 

इसके बाद पहला सन्यासी क्रोधित हो गया और किसी भी समय उससे बात नहीं किया। उसके बाद वो दोनों सन्यासी ध्यान मुद्रा में बैठ गए। तब पहला सन्यासी  की सहायता पर उसके मन में हर बार युवती की बिंदु नजर आ रही थी।



 मुद्रा के बाद पहला सन्यासी दूसरे सन्यासी success bussinessman kaise bane के पास जाकर बोला - कि  तुमने एक स्त्री को छूकर पाप किया है। और उसे शाप लगने के बारे में बताया। 

तब दूसरे सन्यासी में उत्तर दिया कि - मैंने इस बात को पहले ही भुला दिया है। किन्तु आप अभी भी नहीं भुला पाएं। 


शिक्षा :- "जो हो गया , सो हो गया ", किसी भी कार्य को किसी भी समय आरम्भ करने का शुभ मुहूर्त होता है। भूतकाल में हुई गलतियों और नाकामियों का बोझ कभी अपने शिर पर नहीं  लेना चाहिए। गयी बातों को भूलकर भविष्य की चुनौती का सामना करना सफल आरम्भ का मूल मंत्र है।  


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